---------------------------------------------------------------------------------

इस सामूहिक ब्लॉग पर पोस्ट लगाने से पूर्व यह देख लें कि पिछली रचना को लगे अभी कितना समय हुआ है। ध्यान रहे कि प्रत्येक रचनाकार की पोस्ट कम से कम 24 घण्टे
तो [हमारा अतीत] के शीर्ष पटल पर चमकनी ही चाहिए।
इस मंच का रचनाकार बनने के लिये kuldeepsingpinku@gmail.com पर संपर्क करें।

कॉपीराइट नोट

[हमारा अतीत] पर प्रकाशित रचनाओं के सर्वाधिकार इन रचनाओ के रचनाकारों
के पास ही सुर्क्षित हैं, इस ब्लौग पर रचना, रचनाकार के नाम के साथ ही प्रकाशित की जाती है। साथ ही पुनः प्रकाशित रचना का साभार लिंक दिया जाता है। यदि किसी भी कारण से किसी रचनाकार अथवा उनकी रचनाओं के प्रकाशकों
को इस पर आपत्ति हो, तो कृपया
kuldeepsingpinku@gmail.com
पर सूचित करें, इसे तुरंत हटा दिया जाएगा...
निवेदन

[मंच के रचनाकारों से भी मेरा निवेदन है कि रचना, उसके रचनाकार के नाम के साथ ही प्रकाशित होनी चाहिये। स्वयं की रचना किसी भी प्रकार से प्रकाशित की जा सकती है।
सामग्री का चयन करते समय रचनाकार अपनी समझ विवेक एवं ज्ञान का उपयोग करे, ताकि इस ब्लौग पर प्रकाशित रचनाएं आने वाली पीढ़ी के लिये मार्गदर्शक साबित हो सके।
हमारा देश धर्म निरपेक्ष देश है। धर्म निरपेक्षता ही हमारे देश की वास्तविक ताकत है। हमारा यह ब्लॉग भारत के गौरवमय इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने तथा आने वाली पीढ़ी में राष्ट्र प्रेम की अलख जगाने के उद्देश्य से प्रारंभ किया गया है, देश की अखंडता को खंडित करने के लिये नहीं।




शनिवार, 21 नवंबर 2015

मेरा राम तो मेरा हिंदुस्तान है / हरिओम पंवार


चर्चा है अख़बारों में
टी. वी. में बाजारों में
डोली, दुल्हन, कहारों में
सूरज, चंदा, तारों में
आँगन, द्वार, दिवारों में
घाटी और पठारों में
लहरों और किनारों में
भाषण-कविता-नारों में
गाँव-गली-गलियारों में
दिल्ली के दरबारों में

धीरे-धीरे भोली जनता है बलिहारी मजहब की
ऐसा ना हो देश जला दे ये चिंगारी मजहब की

मैं होता हूँ बेटा एक किसानी का
झोंपड़ियों में पाला दादी-नानी का
मेरी ताकत केवल मेरी जुबान है
मेरी कविता घायल हिंदुस्तान है

मुझको मंदिर-मस्जिद बहुत डराते हैं
ईद-दिवाली भी डर-डर कर आते हैं
पर मेरे कर में है प्याला हाला का
मैं वंशज हूँ दिनकर और निराला का

मैं बोलूँगा चाकू और त्रिशूलों पर
बोलूँगा मंदिर-मस्जिद की भूलों पर
मंदिर-मस्जिद में झगडा हो अच्छा है
जितना है उससे तगड़ा हो अच्छा है

ताकि भोली जनता इनको जान ले
धर्म के ठेकेदारों को पहचान ले
कहना है दिनमानों का
बड़े-बड़े इंसानों का
मजहब के फरमानों का
धर्मों के अरमानों का
स्वयं सवारों को खाती है ग़लत सवारी मजहब की |
ऐसा ना हो देश जला दे ये चिंगारी मजहब की ||

बाबर हमलावर था मन में गढ़ लेना
इतिहासों में लिखा है पढ़ लेना
जो तुलना करते हैं बाबर-राम की
उनकी बुद्धि है निश्चित किसी गुलाम की

राम हमारे गौरव के प्रतिमान हैं
राम हमारे भारत की पहचान हैं
राम हमारे घट-घट के भगवान् हैं
राम हमारी पूजा हैं अरमान हैं
राम हमारे अंतरमन के प्राण हैं
मंदिर-मस्जिद पूजा के सामान हैं

राम दवा हैं रोग नहीं हैं सुन लेना
राम त्याग हैं भोग नहीं हैं सुन लेना
राम दया हैं क्रोध नहीं हैं जग वालो
राम सत्य हैं शोध नहीं हैं जग वालों
राम हुआ है नाम लोकहितकारी का
रावण से लड़ने वाली खुद्दारी का

दर्पण के आगे आओ
अपने मन को समझाओ
खुद को खुदा नहीं आँको
अपने दामन में झाँको
याद करो इतिहासों को
सैंतालिस की लाशों को

जब भारत को बाँट गई थी वो लाचारी मजहब की |
ऐसा ना हो देश जला दे ये चिंगारी मजहब की ||

आग कहाँ लगती है ये किसको गम है
आँखों में कुर्सी हाथों में परचम है
मर्यादा आ गयी चिता के कंडों पर
कूंचे-कूंचे राम टंगे हैं झंडों पर
संत हुए नीलाम चुनावी हट्टी में
पीर-फ़कीर जले मजहब की भट्टी में

कोई भेद नहीं साधू-पाखण्डी में
नंगे हुए सभी वोटों की मंडी में
अब निर्वाचन निर्भर है हथकंडों पर
है फतवों का भर इमामों-पंडों पर
जो सबको भा जाये अबीर नहीं मिलता
ऐसा कोई संत कबीर नहीं मिलता

जिनके माथे पर मजहब का लेखा है
हमने उनको शहर जलाते देखा है
जब पूजा के घर में दंगा होता है
गीत-गजल छंदों का मौसम रोता है
मीर, निराला, दिनकर, मीरा रोते हैं
ग़ालिब, तुलसी, जिगर, कबीरा रोते हैं

भारत माँ के दिल में छाले पड़ते हैं
लिखते-लिखते कागज काले पड़ते हैं
राम नहीं है नारा, बस विश्वाश है
भौतिकता की नहीं, दिलों की प्यास है
राम नहीं मोहताज किसी के झंडों का
सन्यासी, साधू, संतों या पंडों का

राम नहीं मिलते ईंटों में गारा में
राम मिलें निर्धन की आँसू-धारा में
राम मिलें हैं वचन निभाती आयु को
राम मिले हैं घायल पड़े जटायु को
राम मिलेंगे अंगद वाले पाँव में
राम मिले हैं पंचवटी की छाँव में

राम मिलेंगे मर्यादा से जीने में
राम मिलेंगे बजरंगी के सीने में
राम मिले हैं वचनबद्ध वनवासों में
राम मिले हैं केवट के विश्वासों में
राम मिले अनुसुइया की मानवता को
राम मिले सीता जैसी पावनता को

राम मिले ममता की माँ कौशल्या को
राम मिले हैं पत्थर बनी आहिल्या को
राम नहीं मिलते मंदिर के फेरों में
राम मिले शबरी के झूठे बेरों में

मै भी इक सौंगंध राम की खाता हूँ
मै भी गंगाजल की कसम उठाता हूँ
मेरी भारत माँ मुझको वरदान है
मेरी पूजा है मेरा अरमान है
मेरा पूरा भारत धर्म-स्थान है
मेरा राम तो मेरा हिंदुस्तान है

साभार लिंक...http://www.kavitakosh.org/kk/%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BE_%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE_%E0%A4%A4%E0%A5%8B_%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BE_%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%A8_%E0%A4%B9%E0%A5%88_/_%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%93%E0%A4%AE_%E0%A4%AA%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

रचना आप को कैसी लगी? अवश्य बताएं...
हमारा देश धर्म निरपेक्ष देश है। धर्म निरपेक्षता ही हमारे देश की वास्तविक ताकत है। हमारा यह ब्लॉग भारत के गौरवमय इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने तथा आने वाली
पीढ़ी में राष्ट्र प्रेम की अलख जगाने के उद्देश्य से प्रारंभ किया गया है, देश की अखंडता को खंडित करने के लिये नहीं।

इस लिये आप की टिप्पणी में किसी भी प्रकार के विवादित शब्दों का उपयोग नहीं होना चाहिये...हमारे गौरवमयी इतिहास के इस ब्लौग को नफरत और कट्टरपंथी चश्मों से बिलकुल न देखा जाए...